Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा की तिथि, महत्व और पूजा विधि
25 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा है। जानिए इसका ज्योतिषीय महत्व, चांदनी में खीर की परंपरा, लक्ष्मी पूजा विधि और सभी राशियों के लिए सरल उपाय।
· 7 मिनट · टीम iAstroGuru
Read in Englishइस वर्ष शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026, रविवार को नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार मनाई जाएगी। यह शुक्ल पक्ष की वह पूर्णिमा है जिसे साल की सबसे उजली पूर्णिमा माना जाता है। इस रात चंद्रमा की चांदनी में खीर रखने की परंपरा पूरे भारत में प्रसिद्ध है। इस लेख में हम इस पर्व का ज्योतिषीय अर्थ, पूजा की सरल विधि, राशि के अनुसार संकेत और कुछ पारंपरिक उपाय बता रहे हैं।
शरद पूर्णिमा क्या है
शरद ऋतु की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। परंपरा में इसे आश्विन मास की पूर्णिमा माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके अलग नाम हैं। उत्तर भारत में इसे कोजागरी पूर्णिमा कहते हैं, ओडिशा में कुमार पूर्णिमा और ब्रज क्षेत्र में रास पूर्णिमा। मान्यता है कि इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था।
लोक मान्यता के अनुसार यही एक रात है जब चंद्रमा अपनी सोलहों कलाओं से पूर्ण होकर चमकता है। इसलिए इस रात को सौंदर्य, शीतलता और मन की प्रसन्नता का प्रतीक माना गया है।
ज्योतिष में चंद्रमा का महत्व
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक कहा गया है। "चन्द्रमा मनसो जातः", यानी चंद्रमा का सीधा संबंध मन, भावनाओं, माता, घर के सुख और मानसिक संतुलन से है। जन्म कुंडली में चंद्रमा जितना बलवान होता है, व्यक्ति उतना ही भावनात्मक रूप से स्थिर माना जाता है।
पूर्णिमा पर चंद्रमा सूर्य से ठीक सामने होता है और पूरी तरह प्रकाशित दिखाई देता है। शास्त्रों में इसे चंद्रमा की सबसे शुभ अवस्था माना गया है। जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, पाप ग्रहों से पीड़ित हो, या जो बार-बार बेचैनी और उलझन महसूस करते हों, उनके लिए शरद पूर्णिमा की रात चंद्र पूजा का विशेष अवसर मानी जाती है।
इस रात को देवी लक्ष्मी से भी जोड़ा जाता है। "कोजागरी" शब्द का अर्थ है "को जागर्ति", यानी "कौन जाग रहा है"। मान्यता है कि देवी लक्ष्मी इस रात पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो भक्त जागकर उनका स्मरण करते हैं, उन पर कृपा करती हैं।
चांदनी में खीर की परंपरा
शरद पूर्णिमा की सबसे प्रिय परंपरा है दूध, चावल और मिश्री से बनी खीर को रात भर चांदनी में रखना। पारंपरिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत जैसी शीतलता बरसाती हैं। सुबह इस खीर को प्रसाद के रूप में परिवार में बांटा जाता है।
- खीर को साफ बर्तन में बनाएं और जाली या पतले सूती कपड़े से ढककर रखें।
- इसे छत या आंगन में ऐसी जगह रखें जहां चांदनी सीधे पड़े।
- सुबह पहले भगवान को भोग लगाएं, फिर परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।
यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है, जो मन की श्रद्धा और परिवार के साथ बिताए समय से जुड़ी है। इसे किसी रोग के उपचार के रूप में न देखें। सेहत से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह ही उचित है।
पूजा की सरल विधि
शरद पूर्णिमा की पूजा बहुत सरल रखी जा सकती है। आप अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इसे कर सकते हैं।
- सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थान को साफ करें और दीपक जलाएं।
- बहुत से लोग इस दिन व्रत रखते हैं और शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलते हैं।
- शाम को देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें। लाल या गुलाबी फूल, अक्षत और मिठाई अर्पित करें।
- चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल में थोड़ा दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें।
- "ॐ सों सोमाय नमः" या "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" मंत्र का अपनी श्रद्धा अनुसार जाप करें।
- रात में कुछ समय जागकर भजन, कीर्तन या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना गया है।
राशि अनुसार संकेत
पूर्णिमा का प्रभाव हर किसी के मन पर कुछ न कुछ पड़ता है, पर अपनी चंद्र राशि के स्वभाव के अनुसार यह रात अलग-अलग बातों पर ध्यान देने का संकेत देती है। ये सामान्य संकेत हैं, सटीक फल के लिए अपनी जन्म कुंडली देखना बेहतर रहता है।
- मेष: स्वभाव में जोश अधिक रहता है, यह रात मन को शांत करने और परिवार के साथ समय बिताने का संकेत देती है।
- वृषभ: चंद्रमा इस राशि में उच्च का माना जाता है, इसलिए लक्ष्मी पूजा और घर की सुख-सजावट आपके लिए विशेष रूप से अनुकूल मानी जाती है।
- मिथुन: विचारों की भागदौड़ के बीच ध्यान और मंत्र जाप मन को स्थिर करने में सहायक माने जाते हैं।
- कर्क: चंद्रमा आपकी राशि का स्वामी है, यह पर्व माता का आशीर्वाद लेने और भावनात्मक रिश्तों को मजबूत करने का अच्छा अवसर है।
- सिंह: आत्मविश्वास के साथ विनम्रता जोड़ने का संकेत है, बड़ों की सेवा शुभ मानी जाती है।
- कन्या: छोटी-छोटी चिंताओं को छोड़कर कृतज्ञता का भाव रखना इस रात का संदेश है।
- तुला: सौंदर्य और संतुलन की राशि होने से कला, संगीत और रास से जुड़ी परंपराएं आपको आनंद दे सकती हैं।
- वृश्चिक: चंद्रमा यहां नीच का माना जाता है, इसलिए चंद्र अर्घ्य और शिव पूजा जैसे पारंपरिक उपाय आपके लिए विशेष माने जाते हैं।
- धनु: धार्मिक कार्य, कथा श्रवण और दान की ओर रुचि बढ़ सकती है।
- मकर: काम के दबाव के बीच कुछ समय अपने और परिवार के लिए निकालना संतुलन लाने का संकेत है।
- कुंभ: समाज सेवा और जरूरतमंदों को भोजन कराना इस दिन शुभ फल देने वाला माना गया है।
- मीन: भक्ति और ध्यान की ओर स्वाभाविक झुकाव रहता है, रात्रि जागरण आपके लिए अनुकूल माना जाता है।
पारंपरिक उपाय (वैकल्पिक)
नीचे दिए उपाय पूरी तरह वैकल्पिक हैं। इन्हें अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार ही अपनाएं, किसी भी उपाय के लिए महंगी वस्तुएं खरीदना आवश्यक नहीं है।
- चंद्र अर्घ्य: चांदी या तांबे के लोटे में जल, दूध और सफेद फूल डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
- सफेद वस्तुओं का दान: चावल, दूध, मिश्री या सफेद वस्त्र का दान चंद्र दोष शांति के लिए परंपरा में बताया गया है।
- लक्ष्मी स्मरण: घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और श्री सूक्त या लक्ष्मी अष्टक का पाठ करें।
- माता का सम्मान: चंद्रमा माता का कारक है, इसलिए मां या मां समान व्यक्ति का आशीर्वाद लेना सबसे सरल और सुंदर उपाय माना जाता है।
- मौन और ध्यान: चांदनी में कुछ देर शांत बैठकर गहरी सांस लेना मन को हल्का करने का सहज तरीका है।
किन बातों का ध्यान रखें
- इस दिन घर में कलह और कटु वचन से बचना शुभ माना गया है।
- तामसिक भोजन से परहेज करने की परंपरा है।
- खीर को रात भर बाहर रखते समय साफ-सफाई और ढकने का ध्यान रखें।
- व्रत रखते समय अपनी सेहत का ध्यान रखें, किसी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
समापन
25 अक्टूबर 2026 की शरद पूर्णिमा मन को शीतलता, घर को प्रकाश और रिश्तों को मिठास देने वाला पर्व है। चंद्रमा की पूर्ण चांदनी हमें याद दिलाती है कि मन का संतुलन ही जीवन के सुख का आधार है। इस रात थोड़ा समय पूजा, परिवार और अपने भीतर की शांति के लिए निकालें। Jyotish Journal की ओर से आप सभी को शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं।




