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मांगलिक जाँच

कुंडली में मंगल दोष, उसकी प्रबलता और भंग देखें, साथ में लग्न और चंद्रमा से मंगल के भाव।

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इस परिणाम को समझें

विवाह मिलान में मांगलिक होना एक पारंपरिक विचार है। यह जाँच मंगल दोष, उसकी प्रबलता और भंग दिखाती है। यह रिश्ते का अंतिम निर्णय नहीं; संवाद और साझा चुनाव भी मायने रखते हैं। अनिश्चित जन्म समय से जो जाँच संभव नहीं, उसका निष्कर्ष नहीं दिया जाता।

मांगलिक जाँच कैसे होती है

मंगल दोष दो संदर्भ बिंदुओं से देखा जाता है, लग्न और चंद्रमा। किसी से भी पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल हो तो दोष माना जाता है।

भाव गिनना

संदर्भ राशि से मंगल की राशि तक 1 से गिनें। वृषभ लग्न में तुला का मंगल छठे भाव में है; कन्या के चंद्रमा से वही दूसरे भाव में है।

प्रबलता

दोनों संदर्भों से हो तो दोष पूर्ण माना जाता है; केवल एक से हो तो आंशिक। कई परंपराएँ आंशिक रूप को हल्का मानती हैं।

दोष भंग

मंगल अपनी राशि (मेष, वृश्चिक) में या मकर में उच्च का हो, यह सबसे अधिक मान्य परिहार है। अन्य लोकप्रिय परिहार परिणाम में अलग दिखाए जाते हैं, क्योंकि उन पर परंपराएँ एकमत नहीं हैं।

उदाहरण: तीन काल्पनिक कुंडलियाँ

हर पंक्ति एक काल्पनिक कुंडली है; भाव लग्न से और चंद्रमा से गिने गए हैं।

लग्नचंद्रमंगललग्न सेचंद्र सेपरिणाम
वृषभकन्यातुला62आंशिक (एक संदर्भ से)
मिथुनधनुधनु71मांगलिक (दोनों संदर्भ से)
मिथुनकर्कमकर87भंग (मंगल बलवान)

यही नियम ऊपर की मुफ़्त जाँच और कुंडली मिलान में चलते हैं।

मांगलिक होना आम है: इन नियमों से बहुत सी कुंडलियाँ किसी एक संदर्भ से मांगलिक होती हैं। यह किसी व्यक्ति या रिश्ते पर अंतिम निर्णय नहीं है।

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