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दशा कैलकुलेटर
आरंभ और समाप्ति की तिथियों सहित वर्तमान महादशा, अंतर्दशा और जीवन की महादशाओं का क्रम देखें।
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दशाएँ ग्रहों से जुड़ी जीवन की पारंपरिक अवधियाँ हैं। जानें आज कौन-सी अवधि चल रही है और अगली कब शुरू होगी। इन तिथियों के लिए सटीक जन्म समय चाहिए; दशाएँ चिंतन के विषय हैं, निश्चित घटनाओं की गारंटी नहीं।
विंशोत्तरी दशा की तिथियाँ कैसे निकलती हैं
विंशोत्तरी पद्धति 120 वर्ष के चक्र को नौ ग्रहों में बाँटती है: केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 और बुध 17 वर्ष।
पहली महादशा
जन्म नक्षत्र का स्वामी पहले चलता है। उस नक्षत्र में चंद्रमा ने जितना भाग पार नहीं किया, उतनी ही दशा शेष रहती है, इसलिए पहली अवधि प्रायः पूरी अवधि से छोटी होती है।
अंतर्दशाएँ
हर महादशा उसी क्रम में नौ अंतर्दशाओं में बँटती है, अपने ही स्वामी से शुरू होकर। हर अंतर्दशा = (महादशा वर्ष × उप-स्वामी वर्ष) ÷ 120।
समय क्यों मायने रखता है
चंद्रमा एक घंटे में लगभग आधा अंश चलता है। दो घंटे की चूक चंद्रमा को लगभग एक अंश खिसका देती है, जिससे हर दशा तिथि कई महीने बदल सकती है।
उदाहरण: एक काल्पनिक जन्म
जन्म 1 जनवरी 2000, चंद्रमा 100° पर, पुष्य नक्षत्र (स्वामी शनि) में 50% पार। शनि की शेष दशा: 19 × 50% = 9.5 वर्ष।
| महादशा | से | तक |
|---|---|---|
| शनि | जन॰ 2000 | जुल॰ 2009 |
| बुध | जुल॰ 2009 | जुल॰ 2026 |
| केतु | जुल॰ 2026 | जुल॰ 2033 |
| शुक्र | जुल॰ 2033 | जुल॰ 2053 |
| सूर्य | जुल॰ 2053 | जुल॰ 2059 |
बुध महादशा के भीतर: बुध 2.41 वर्ष, केतु 0.99 वर्ष, शुक्र 2.83 वर्ष, इत्यादि।
दशाएँ चिंतन के विषय बताती हैं। वे निश्चित घटनाओं की गारंटी नहीं हैं, और कोई अवधि अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं होती।
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