दिवाली ऑफ़र: भाई दूज (12 नवंबर) तक हर रिपोर्ट पर अतिरिक्त 20% छूट, प्रति ग्राहक अधिकतम 3 रिपोर्ट। भुगतान पर अपने आप लागू। रिपोर्ट देखें →

त्योहार

छठ पूजा 2026: 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य, महत्व और पूजा विधि

छठ पूजा 2026 में 15 नवंबर को अस्त होते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। जानिए सूर्य उपासना का ज्योतिषीय महत्व, पूजा विधि और वैकल्पिक पारंपरिक उपाय।

· 6 मिनट · टीम iAstroGuru

Read in English

छठ पूजा 2026 में 15 नवंबर (नई दिल्ली के अनुसार) को मनाई जाएगी। यह शुक्ल पक्ष का पर्व है। इस दिन श्रद्धालु घाटों पर खड़े होकर अस्त होते सूर्य को संध्या अर्घ्य देंगे। सूर्य देव और छठी मैया की यह उपासना आस्था, अनुशासन और कृतज्ञता का प्रतीक है। ज्योतिष की नज़र से भी यह दिन सूर्य से जुड़े शुभ फलों को मज़बूत करने का अवसर माना जाता है।

छठ पूजा 2026 की तिथि और मुख्य बात

  • तिथि: 15 नवंबर 2026 (नई दिल्ली)
  • पक्ष: शुक्ल पक्ष
  • मुख्य अनुष्ठान: अस्त होते सूर्य को संध्या अर्घ्य

छठ अकेला ऐसा बड़ा पर्व है जिसमें उगते सूर्य के साथ-साथ ढलते सूर्य की भी पूजा होती है। इसके पीछे एक गहरा संदेश है। जीवन में उतार भी उतना ही पूज्य है जितना उदय। जो व्यक्ति ढलते समय को भी सम्मान देता है, उसके लिए नया सवेरा और सुंदर बनता है। स्थानीय सूर्यास्त का सही समय अपने शहर के पंचांग या स्थानीय पुरोहित से ज़रूर देख लें, क्योंकि यह हर स्थान पर अलग होता है।

सूर्य देव का ज्योतिषीय महत्व

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा और आत्मकारक कहा गया है। कुंडली में सूर्य आत्मविश्वास, पिता, सरकारी क्षेत्र, मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमज़ोर, पीड़ित या शत्रु ग्रहों के प्रभाव में हो, उनके लिए यह संकेत होता है कि आत्मविश्वास में कमी, पिता से मतभेद या करियर में पहचान मिलने में देरी जैसी स्थितियां बन सकती हैं।

शास्त्रों में सूर्य को अर्घ्य देना सूर्य को मज़बूत करने का सबसे सरल और प्रभावी पारंपरिक उपाय माना गया है। छठ पर यह अर्घ्य सामूहिक श्रद्धा और कठोर व्रत के साथ दिया जाता है, इसलिए परंपरा में इसका फल विशेष माना जाता है।

छठी मैया कौन हैं

लोक मान्यता में छठी मैया को सूर्य देव की बहन और संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। कई परंपराओं में इन्हें षष्ठी देवी कहा गया है, जो बच्चों के सुख, परिवार की खुशहाली और घर की उन्नति का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि परिवार की मंगलकामना के लिए माताएं और अन्य व्रती पूरी निष्ठा से यह व्रत रखते हैं।

छठ पर्व का पारंपरिक क्रम

छठ आमतौर पर कई दिनों का पर्व होता है। परंपरा में इसका क्रम कुछ इस प्रकार रहता है:

  • नहाय-खाय: स्नान के बाद सात्विक भोजन, जिसमें अक्सर लौकी और चने की दाल बनाई जाती है।
  • खरना: दिन भर व्रत के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद, इसके बाद निर्जला व्रत की शुरुआत।
  • संध्या अर्घ्य: अस्त होते सूर्य को जल और दूध से अर्घ्य, ठेकुआ, फल और सूप-दउरा के साथ।
  • उषा अर्घ्य: अगली सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण।

इन चरणों की सटीक तारीखें अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना अच्छा रहता है।

संध्या अर्घ्य की विधि

संध्या अर्घ्य छठ का सबसे भावुक और सुंदर क्षण होता है। पारंपरिक विधि इस प्रकार है:

  • घाट, तालाब या नदी किनारे पहले से साफ़-सफ़ाई करके स्थान तैयार किया जाता है। जहां घाट उपलब्ध न हो, वहां लोग घर की छत या आंगन में पानी भरे बर्तन में खड़े होकर भी अर्घ्य देते हैं।
  • बांस के सूप या दउरा में ठेकुआ, गन्ना, केला, नारियल, मौसमी फल और दीपक सजाए जाते हैं।
  • व्रती पानी में खड़े होकर सूर्य की ओर मुख करते हैं और तांबे के लोटे या सूप से जल व दूध का अर्घ्य देते हैं।
  • अर्घ्य देते समय "ॐ सूर्याय नमः" या "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का जाप किया जा सकता है।
  • परिवार के सदस्य व्रती के सूप को स्पर्श करके आशीर्वाद में भागीदार बनते हैं।
  • शाम को छठ के लोकगीत गाने की परंपरा माहौल को और पवित्र बना देती है।

किन लोगों के लिए यह दिन विशेष माना जाता है

ज्योतिषीय दृष्टि से नीचे बताई गई स्थितियों वाले लोगों के लिए छठ की सूर्य उपासना विशेष रूप से अर्थपूर्ण मानी जाती है:

  • जिनकी कुंडली में सूर्य नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो।
  • जिनकी सिंह राशि या सिंह लग्न हो, क्योंकि सूर्य इनका स्वामी है।
  • जो सरकारी नौकरी, प्रशासन, राजनीति या नेतृत्व वाले career में आगे बढ़ना चाहते हैं।
  • जिनके पिता से संबंधों में दूरी या तनाव चल रहा हो।
  • जो सार्वजनिक जीवन में मान-सम्मान और पहचान की कमी महसूस कर रहे हों।
  • जो संतान सुख और परिवार की खुशहाली की कामना रखते हैं।

परंपरा यह संकेत देती है कि श्रद्धा से की गई सूर्य उपासना से आत्मबल बढ़ता है और सोच में स्पष्टता आती है। इससे जीवन के फैसलों में सकारात्मक बदलाव की संभावना बनती है।

वैकल्पिक पारंपरिक उपाय

ये उपाय पूरी तरह वैकल्पिक हैं। अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार इनमें से कोई भी अपनाया जा सकता है। इनके लिए कुछ भी ख़रीदना ज़रूरी नहीं है।

  • आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ संध्या अर्घ्य से पहले या अगली सुबह किया जा सकता है।
  • सूर्य के बारह नामों का स्मरण करना शुभ माना जाता है, जैसे मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूषा, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सविता, अर्क और भास्कर।
  • गुड़, गेहूं या तांबे का दान अपनी क्षमता के अनुसार किया जा सकता है।
  • व्रती की सेवा करना, घाट की सफ़ाई में हाथ बंटाना या प्रसाद बांटना भी पुण्य का काम माना जाता है।
  • पिता या पिता समान बुज़ुर्गों का आशीर्वाद लेना सूर्य को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है।
  • छठ के बाद भी रोज़ सुबह तांबे के लोटे से सूर्य को जल देने की आदत डाली जा सकती है।

व्रत के समय ध्यान रखने योग्य बातें

छठ का निर्जला व्रत कठिन होता है, इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही ज़रूरी है:

  • गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग और कोई पुरानी बीमारी वाले लोग व्रत का निर्णय लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। परंपरा में श्रद्धा को सबसे ऊपर माना गया है, शरीर को कष्ट देने को नहीं।
  • ठंडे पानी में ज़्यादा देर खड़े रहने से बचें और घाट पर सुरक्षा का ध्यान रखें।
  • बच्चों को गहरे पानी से दूर रखें।
  • पूजा में प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करें और नदी-तालाब को साफ़ रखें। प्रकृति का सम्मान ही छठ की असली भावना है।

छठ का आध्यात्मिक संदेश

छठ हमें सिखाता है कि प्रकृति, जल, सूर्य और परिवार ही हमारे जीवन का आधार हैं। इसमें कोई पुरोहित अनिवार्य नहीं, कोई बड़ा आडंबर नहीं। बस शुद्ध मन, अनुशासन और कृतज्ञता चाहिए। ज्योतिष में भी सूर्य को आत्मा का कारक कहा गया है, और छठ आत्मा को शुद्ध करने का पर्व है।

समापन

15 नवंबर 2026 को जब घाटों पर दीपक जलेंगे और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, तब यह क्षण परिवार के लिए आशीर्वाद और नई ऊर्जा का संकेत लेकर आएगा। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इस पर्व को मनाएं, सेहत का ध्यान रखें और सूर्य देव व छठी मैया से सबके कल्याण की कामना करें। iAstroGuru परिवार की ओर से आप सभी को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं।

मुफ़्त टूल देखें →

अपनी कुंडली से गहराई में जानें

आने वाला वर्ष

चुने हुए वर्ष के गोचर और दशा, और योजना के लिए चिंतन के विषय।

  • एक नज़र में आपका वर्ष
  • वर्ष की दशा
  • शनि, गुरु, राहु और केतु
लंबाई
लगभग १०–१४ पृष्ठ
कीमत
₹199 ₹349

संपूर्ण कुंडली

एक सहेजी हुई जन्म कुंडली का गहरा, व्यवस्थित अध्ययन।

  • एक नज़र में आपकी कुंडली
  • आपकी मुख्य भविष्यवाणियाँ
  • लग्न: शरीर, स्वभाव और मार्ग
लंबाई
लगभग ७५–८५ पृष्ठ
कीमत
₹299 ₹499

iAstroGuru टीम से पूछें

इस विषय पर एक सामान्य प्रश्न (15–500 अक्षर)। प्रश्न और हमारे उत्तर यहाँ केवल आपके नाम के पहले अक्षर के साथ दिखते हैं। जन्म विवरण या निजी जानकारी न लिखें।