Dussehra 2026: विजयादशमी 20 अक्टूबर, महत्व और पूजा विधि
दशहरा 2026 (विजयादशमी) 20 अक्टूबर को है। जानिए इस शुक्ल पक्ष के पर्व का ज्योतिषीय महत्व, शमी और अपराजिता पूजा, शस्त्र पूजा और वैकल्पिक उपाय।
· 6 मिनट · टीम iAstroGuru
Read in Englishइस वर्ष दशहरा यानी विजयादशमी 20 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। यह पर्व शुक्ल पक्ष की दशमी को आता है और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। नवरात्रि के नौ दिनों की साधना के बाद आने वाला यह दिन नई शुरुआत, साहस और आत्मविश्वास का संदेश लेकर आता है।
दशहरा 2026: तिथि और पक्ष
नई दिल्ली के अनुसार विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर 2026 को है। यह तिथि शुक्ल पक्ष में पड़ती है, यानी चंद्रमा बढ़ती कलाओं में होता है। वैदिक ज्योतिष में शुक्ल पक्ष को वृद्धि, विस्तार और शुभ कार्यों के आरंभ के लिए अनुकूल माना गया है। परंपरा में आश्विन मास की शुक्ल दशमी को दशहरा मनाया जाता है, और इसे वर्ष के उन विशेष दिनों में गिना जाता है जिन्हें स्वयं में शुभ माना जाता है।
स्थानीय पूजा समय और मुहूर्त अपने शहर के पंचांग या स्थानीय पुरोहित से देख लेना उचित रहता है, क्योंकि सूर्योदय और तिथि का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।
विजयादशमी का पौराणिक महत्व
दशहरे से दो प्रमुख कथाएँ जुड़ी हैं। पहली कथा के अनुसार भगवान श्रीराम ने इसी दिन रावण पर विजय प्राप्त की थी। रावण बहुत विद्वान था, पर अहंकार ने उसका पतन कराया। इसलिए दशहरा हमें याद दिलाता है कि ज्ञान और शक्ति के साथ विनम्रता भी जरूरी है।
दूसरी कथा माँ दुर्गा से जुड़ी है। नौ दिनों के युद्ध के बाद दसवें दिन देवी ने महिषासुर का अंत किया। इसी कारण नवरात्रि के बाद यह दिन विजय के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। बंगाल और पूर्वी भारत में इस दिन देवी प्रतिमा का विसर्जन होता है, जबकि उत्तर भारत में रावण दहन की परंपरा है।
दशहरा शब्द को कई विद्वान 'दस हरा' से जोड़ते हैं, यानी दस बुराइयों का नाश। इन्हें काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसी प्रवृत्तियों के रूप में समझा जाता है। रावण के दस सिर भी इन्हीं का प्रतीक माने जाते हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से दशहरा
वैदिक ज्योतिष में विजयादशमी को अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में रखा जाता है। इसका अर्थ है कि इस दिन कई शुभ कार्य बिना अलग से मुहूर्त निकाले भी शुरू किए जा सकते हैं, ऐसा परंपरागत मत है। इसी वजह से बहुत से लोग इस दिन नया व्यापार, नई पढ़ाई, वाहन या घर से जुड़े काम, या कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करना पसंद करते हैं।
शुक्ल पक्ष की दशमी पर चंद्रमा की बढ़ती रोशनी मन में उत्साह और स्पष्टता का संकेत देती है। ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए यह समय पुराने डर छोड़कर नए संकल्प लेने के लिए अच्छा माना जाता है। दशमी तिथि को परंपरा में विजय और साहस से जोड़ा गया है, और इसका संबंध मंगल जैसी ऊर्जा से भी समझा जाता है, जो पराक्रम और कर्म का प्रतीक है।
दशहरे की प्रमुख परंपराएँ
शमी पूजा: दशहरे पर शमी वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के समय अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे और विजयादशमी पर उन्हें वापस लिया था। ज्योतिष में शमी को शनि से जुड़ा माना जाता है, इसलिए शमी पूजा को शनि संबंधी कष्टों में राहत की भावना से भी किया जाता है। कई स्थानों पर शमी के पत्ते 'सोना' कहकर एक-दूसरे को दिए जाते हैं।
अपराजिता पूजा: अपराजिता देवी विजय की देवी मानी जाती हैं। दशहरे के दिन उनकी पूजा करके जीवन में आने वाली बाधाओं पर विजय की कामना की जाती है।
शस्त्र और उपकरण पूजा: परंपरा में इस दिन शस्त्रों की पूजा होती है। आज के समय में लोग अपने काम के औजार, किताबें, कंप्यूटर, वाहन और व्यापार के साधनों की भी पूजा करते हैं। इसका भाव यह है कि जिन साधनों से हमारी आजीविका चलती है, उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाए।
सीमोल्लंघन: पुराने समय में राजा इस दिन अपनी सीमा पार करके नए अभियान शुरू करते थे। आज इसका भाव अपनी सीमाओं और डर से आगे बढ़ने के रूप में लिया जाता है।
रावण दहन: शाम को रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया जाता है। यह अपने भीतर की बुराइयों को जलाने का प्रतीक है।
सरल पूजा विधि
जो लोग घर पर विजयादशमी की पूजा करना चाहते हैं, वे परंपरा के अनुसार यह क्रम अपना सकते हैं:
- सुबह स्नान करके घर के पूजा स्थान को साफ करें और भगवान श्रीराम तथा माँ दुर्गा का ध्यान करें।
- एक चौकी पर अपराजिता देवी का प्रतीक या चित्र रखकर रोली, अक्षत, फूल और दीप से पूजा करें।
- अपने काम के उपकरण, किताबें या वाहन को साफ करके उन पर तिलक लगाएँ।
- संभव हो तो शमी वृक्ष के पास दीपक जलाएँ और उसकी परिक्रमा करें।
- घर के बड़ों का आशीर्वाद लें और परिवार के साथ मिठाई बाँटें।
राशि के अनुसार दशहरे का संकेत
दशहरे का संदेश हर राशि के लिए अलग रंग में दिखता है, पर मूल भाव एक ही है: अपनी कमजोरी को पहचानना और उस पर विजय पाना। ज्योतिष के सामान्य सिद्धांतों के आधार पर कुछ संकेत इस प्रकार हैं:
- अग्नि तत्व की राशियाँ (मेष, सिंह, धनु): यह दिन जल्दबाजी और क्रोध पर नियंत्रण का संदेश देता है। साहस के साथ धैर्य जुड़ जाए तो नए काम की शुरुआत अच्छी मानी जाती है।
- पृथ्वी तत्व की राशियाँ (वृषभ, कन्या, मकर): करियर या धन से जुड़ी योजनाओं को व्यवस्थित ढंग से शुरू करने के लिए यह दिन प्रेरणा देता है। जिद और जरूरत से ज्यादा चिंता छोड़ने का संकेत है।
- वायु तत्व की राशियाँ (मिथुन, तुला, कुंभ): रिश्तों और संवाद में स्पष्टता लाने का समय है। अधूरे संकल्पों को पूरा करने की इच्छा जाग सकती है।
- जल तत्व की राशियाँ (कर्क, वृश्चिक, मीन): भावनात्मक बोझ और पुरानी कड़वाहट छोड़ने का संकेत मिलता है। मन की शांति के लिए ध्यान और प्रार्थना सहायक मानी जाती है।
व्यक्तिगत प्रभाव जन्म कुंडली की ग्रह स्थिति पर निर्भर करता है, इसलिए इसे सामान्य संकेत के रूप में ही देखें।
वैकल्पिक पारंपरिक उपाय
ये उपाय पूरी तरह आस्था पर आधारित हैं और अपनी सुविधा व श्रद्धा के अनुसार ही अपनाए जा सकते हैं:
- शमी वृक्ष के नीचे शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाना शनि संबंधी परेशानियों में शांति के भाव से किया जाता है।
- श्रीराम रक्षा स्तोत्र या सुंदरकांड का पाठ मन में साहस और स्थिरता लाने के लिए परंपरा में किया जाता है।
- 'ॐ अपराजितायै नमः' मंत्र का श्रद्धा से जप बाधाओं पर विजय की कामना के लिए किया जाता है।
- जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करना इस दिन बहुत पुण्यदायी माना गया है।
- अपनी किसी एक बुरी आदत को छोड़ने का संकल्प लेना शायद सबसे सार्थक उपाय है।
समापन
20 अक्टूबर 2026 की विजयादशमी केवल रावण दहन का उत्सव नहीं, बल्कि अपने भीतर झाँकने का अवसर भी है। शुक्ल पक्ष की इस दशमी पर नई शुरुआत, कृतज्ञता और आत्मसंयम का भाव जीवन में सकारात्मक दिशा का संकेत देता है। iAstroGuru की ओर से आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएँ। यह पर्व आपके जीवन में साहस, सद्बुद्धि और सफलता लेकर आए।
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